महिलाओं के लिए करुंगाली माला पहनने के नियम

महिलाओं के लिए करुंगाली माला पहनने के नियम

करुंगाली माला, जिसे एबोनी की लकड़ी से बनी पवित्र माला कहा जाता है, नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और सुरक्षा प्रदान करने के लिए जानी जाती है। महिलाएं इसे भक्ति, शांति और आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से पहन सकती हैं, क्योंकि कोई धार्मिक ग्रंथ इसमें लिंग-आधारित प्रतिबंध नहीं लगाता।

करुंगाली माला दक्षिण भारत, खासकर तमिल परंपराओं में प्रचलित है, जो भगवान मुरुगन से जुड़ी हुई है। यह काली लकड़ी से बनी होती है और 54 या 108 मनके वाली होती है, जो सुरक्षा, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन प्रदान करती है

करुंगली माला: पहनने के नियम, शुभ दिन और सही विधि

महिलाओं के लिए यह विशेष रूप से लाभदायक है, क्योंकि यह तनाव कम करती है और दैनिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखती है। पुरानी रीति-रिवाजों में कभी-कभी भ्रम फैलाया गया, लेकिन आधुनिक आध्यात्मिक विशेषज्ञ सभी को पहनने की अनुमति देते हैं

हां, महिलाएं करुंगाली माला आसानी से पहन सकती हैं—यह पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए समान रूप से उपलब्ध है। कोई शास्त्रीय नियम महिलाओं को रोकता नहीं है; पुरानी सांस्कृतिक मान्यताएं ही कभी-कभी भ्रम पैदा करती हैं।

ऐतिहासिक रूप से, महिलाएं इसे चावल पीसने के औजार उल्लक्कई में इस्तेमाल करती रहीं, जो इसकी शुद्धता को दर्शाता है। गर्भवती महिलाओं को वजन के कारण सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन सामान्यतः कोई समस्या नहीं।

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पहनने के सामान्य नियम

पहली बार पहनने से पहले माला को गुलाब जल में भिगोकर साफ पानी से धोएं। पूजा स्थल पर रखकर शुभ मुहूर्त में, जैसे मंगलवार या शनिवार को, स्नान करने के बाद धारण करें।
इसे गले में या कलाई पर लपेटकर पहनें, शांत मन से संकल्प लें और मंत्र जपें, जैसे "ॐ शं शनैश्चराय नमः"।

दैनिक उपयोग के नियम

  • पूजा या ध्यान के दौरान पहनें, इससे अधिक लाभ मिलता है।
  • स्नान, सोते समय, या गैर-शाकाहारी भोजन करते समय उतार लें।
  • बहस, अशुद्ध वातावरण या भावनात्मक उथल-पुथल में न पहनें; इसे पूजा कक्ष में रखें।

मासिक धर्म के दौरान पहनना

मासिक धर्म के समय भी महिलाएं करुंगाली माला पहन सकती हैं—कोई शास्त्रीय निषेध नहीं है। पुरानी प्रथाओं में कुछ परिवार इसे टालते थे, लेकिन आधुनिक विशेषज्ञ भावनात्मक संतुलन के लिए अनुशंसित करते हैं।
स्तनपान या दूध पिलाते समय भी कोई समस्या नहीं; बस सम्मान बनाए रखें।

माला को रेशमी या सूती कपड़े में लपेटकर साफ जगह पर रखें, कभी फर्श पर न डालें। नियमित रूप से गुलाब जल से साफ करें ताकि इसकी ऊर्जा बनी रहे।
गलत उपयोग से ऊर्जा कमजोर हो सकती है, इसलिए हमेशा श्रद्धा से व्यवहार करें।

 

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